33 केवी मरैला उपकेंद्र का मामला, उपभोक्ता से लाखों की अवैध वसूली का खुलासा!
अंबेडकर नगर। योगी सरकार भले ही बार-बार “भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस” का दावा करती हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी कह रही है। ताज़ा मामला 33 केवी मरैला उपकेंद्र का है, जहां उपभोक्ता से लाखों की अवैध वसूली और विभागीय गोरखधंधे का पर्दाफाश हुआ है।
मौर्यनगर गौहन्ना शहजादपुर निवासी उपभोक्ता दीपावली ने लाइन खिंचवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन (संख्या 1012171934) के तहत 20 जून 2024 को विभागीय स्टीमेट व कनेक्शन शुल्क ₹53,016 विभाग के खाते में जमा किया।
लेकिन इसके बाद भ्रष्टाचार का खेल शुरू हुआ। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार आउटसोर्स संविदा कर्मी लाइनमैन बालमुकुंद गुप्ता ने विभागीय शुल्क के अलावा उपभोक्ता से ₹38,000 अपने निजी खाते में गूगल पे से मंगवा लिए।
लेनदेन का विवरण:
- 27/07/2024 – ₹3000
- 19/07/2024 – ₹10,000
- 19/06/2024 – ₹20,000
- 19/06/2024 – ₹5000
- यानी कुल ₹38,000 सीधे भ्रष्टाचार की जेब में!
- स्टीमेट चार पोल का, खड़े कर दिए आठ पोल
मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि विभागीय स्टीमेट केवल चार पोल का था, लेकिन ज़मीन पर आठ पोल खड़े कर दिए गए। यह साफ संकेत है कि भ्रष्टाचार की जड़ें सिर्फ लाइनमैन तक सीमित नहीं बल्कि बड़े अफसरों तक फैली हैं।
खुद बालमुकुंद गुप्ता खुलेआम डींग मारता है –
“मेरी पहुंच सीधे चीफ साहब तक है, अधीक्षण अभियंता मेरी जेब में हैं। कोई मेरी नौकरी नहीं छीन सकता।”
पुराना विवाद भी रहा है
ये पहला मामला नहीं है। जब गुप्ता की तैनाती जाफरगंज पावर हाउस पर थी तब भी चक्की कनेक्शन में घोटाला पकड़ा गया था। शिकायत पर कार्रवाई हुई, नौकरी भी समाप्त की गई, लेकिन भ्रष्ट सिस्टम की वजह से आज वही कर्मी फिर से मलाई काट रहा है।
बड़े सवाल – जवाब मांगेगी जनता
- आखिर इतने ठोस सबूतों के बावजूद ऐसे संविदा कर्मी को क्यों संरक्षण मिलता है?
- क्या विभागीय अफसरों से लेकर लखनऊ तक रिश्वत का खेल चल रहा है?
जब एक साधारण उपभोक्ता को बिजली कनेक्शन के लिए रिश्वत देनी पड़ रही है तो योगी सरकार की “भ्रष्टाचार मुक्त यूपी” की नीति कहाँ गई?
मरैला उपकेंद्र के अवर अभियंता और उपखंड अधिकारी से संपर्क की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।
जनता पूछ रही है – योगी जी, आपके राज में आखिर कब तक उपभोक्ता भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ते रहेंगे?