गुणवत्ताविहीन तेल में समोसे तलने की तस्वीरें आईं सामने, जनता की सेहत से खुला खिलवाड़।
अंबेडकरनगर। मसड़ा मोहनपुर बाज़ार स्थित मुकेश समोसे वाले से जुड़े विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। बासी व गुणवत्ता विहीन तेल में समोसे तलने के आरोपों तथा मानसिक रूप से विक्षिप्त युवक के साथ की गई अमानवीय पिटाई के मामले के बाद अब एक नया और गंभीर पहलू सामने आया है। आरोप है कि मुकेश के कुछ तथाकथित समर्थक—जो उसके “टुकड़े पर पलने वाले” बताए जा रहे हैं—उसके कृत्यों पर पर्दा डालने का प्रयास कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जैसे ही मामला तूल पकड़ने लगा, वैसे ही कुछ लोग खुलकर दुकान संचालक के बचाव में उतर आए और सच्चाई को दबाने की कोशिश शुरू कर दी। हालांकि, सामने आई तस्वीरें इन तमाम दावों की पोल खोलती नजर आ रही हैं।
तस्वीरें कर रहीं सच्चाई उजागर
तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह गहरे रंग के, जले हुए और गुणवत्ता विहीन तेल में समोसे तले जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह का तेल स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक होता है और लंबे समय तक सेवन करने पर गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
बावजूद इसके खुलेआम उसी तेल का इस्तेमाल कर लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
समर्थकों की भूमिका सवालों के घेरे में
अब सवाल यह उठ रहा है कि जो लोग आरोपी दुकानदार के कृत्यों पर पर्दा डालने का प्रयास कर रहे हैं, उनकी मंशा क्या है? क्या निजी स्वार्थ के चलते जनता की सेहत और मानवता को नजरअंदाज किया जा रहा है? क्या ऐसे लोग भी इस पूरे प्रकरण में बराबर के जिम्मेदार नहीं माने जाने चाहिए—यह सवाल अब आम जनमानस के बीच उठने लगा है।
मानसिक रूप से विक्षिप्त के साथ अमानवीय व्यवहार, पुलिस की कार्रवाई
मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्ति के साथ की गई मारपीट और अमानवीय व्यवहार के मामले में बसखारी पुलिस ने कार्रवाई करते हुए संबंधित पक्ष के खिलाफ धारा 151 के तहत निरोधात्मक कार्रवाई की है।
पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आगे किसी अप्रिय स्थिति से बचने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। वायरल वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर मामले की जांच भी की जा रही है।
प्रशासन की चुप्पी भी संदेह के घेरे में
इतने गंभीर आरोपों, वायरल वीडियो और तस्वीरों के सामने आने के बावजूद खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से अब तक ठोस और सार्वजनिक कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है। यदि समय रहते खाद्य गुणवत्ता की जांच और कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह मामला केवल एक दुकान तक सीमित न रहकर पूरे क्षेत्र की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न बन सकता है।
- स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि
- समोसा दुकान की तत्काल जांच कर तेल के सैंपल लिए जाएं
- दोषी पाए जाने पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो
- आरोपी के साथ-साथ उसे संरक्षण देने वालों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की जाए
अब देखना यह होगा कि प्रशासन और संबंधित विभाग इस मामले में कितनी पारदर्शिता और सख्ती दिखाते हैं।

