मुकेश समोसे वाले के यहां बासी तेल का खेल जारी, खाद्य सुरक्षा विभाग की चुप्पी बनी रहस्य
अंबेडकरनगर। मसड़ा मोहनपुर बाज़ार स्थित मुकेश समोसे वाले के यहां बासी और गुणवत्ता विहीन तेल में समोसे तलने के आरोपों को कई दिन बीत चुके हैं। तस्वीरें सामने आ चुकी हैं, सोशल मीडिया से लेकर आम जनता तक में आक्रोश है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग अब तक पूरी तरह खामोश बना हुआ है।
यह कोई आरोप भर नहीं है—तस्वीरें खुद गवाही दे रही हैं कि किस तरह जले हुए, काले और बदबूदार तेल में समोसे तले जा रहे हैं। इसके बावजूद विभाग का न निरीक्षण, न सैंपलिंग और न कोई सार्वजनिक बयान सामने आना सीधे तौर पर विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
क्या विभाग किसी अनहोनी का इंतजार कर रहा है?
- सबसे बड़ा और तीखा सवाल यही है कि
- जब सबूत सामने हैं तो कार्रवाई क्यों नहीं?
- क्या खाद्य सुरक्षा विभाग सिर्फ कागजों में ही सक्रिय है?
- क्या नियम सिर्फ छोटे दुकानदारों के लिए हैं और प्रभावशाली लोगों के लिए आंख मूंद ली जाती है ?
अगर यही रवैया रहा तो यह कहना गलत नहीं होगा कि विभाग जनता की सेहत की नहीं, बल्कि दुकानदारों की ढाल बनकर खड़ा है।
सेहत का सौदा, सिस्टम की मिलीभगत?
खाद्य विशेषज्ञ साफ कहते हैं कि बार-बार इस्तेमाल किया गया जला हुआ तेल स्लो पॉइजन होता है। इसके बावजूद अगर खुलेआम यह धंधा चलता रहे और विभाग चुप रहे, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि संभावित मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्रवाई न होना यह दर्शाता है कि या तो-
- विभागीय अधिकारी जानबूझकर आंखें मूंदे हैं
- या फिर किसी दबाव में मामले को ठंडे बस्ते में डाला जा रहा है
समर्थक सक्रिय, विभाग निष्क्रिय!
जहां एक ओर तथाकथित समर्थक मामले को दबाने और सच्चाई को झुठलाने में लगे हैं, वहीं दूसरी ओर विभाग की निष्क्रियता इन प्रयासों को और हवा दे रही है। सवाल यह है कि क्या विभाग भी इस पर्दा डालने की कवायद का हिस्सा बन चुका है?

