जिले के सबसे महंगे समोसे में ज़हर , 15 रुपये का समोसा, बासी तेल का खेल !
अंबेडकरनगर। पूरे जिले में स्वाद के नाम पर पहचान बना चुके मसड़ा बाज़ार के 15 रुपये प्रति पीस बिकने वाले समोसे—जो जिले के सबसे महंगे समोसे माने जाते हैं—अब गंभीर और चौंकाने वाले आरोपों में घिर गए हैं। सूत्रों की मानें तो बाज़ार में संचालित मुकेश समोसे वाले की दुकान पर लंबे समय से एक ही तेल को कई-कई दिनों तक बार-बार गर्म कर समोसे तले जा रहे हैं, जिससे आम जनता की सेहत के साथ खुला खिलवाड़ किया जा रहा है।
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों का दावा है कि दुकानों पर इस्तेमाल किया जा रहा तेल बार-बार उबालने और तलने के कारण काला पड़ चुका है, उससे दुर्गंध आने लगती है, बावजूद इसके उसी जले हुए तेल में समोसे तैयार कर ग्राहकों को परोसे जा रहे हैं। सवाल यह है कि जब 15 रुपये प्रति पीस की दर से जिले के सबसे महंगे समोसे बेचे जा रहे हैं, तो क्या गुणवत्ता और शुद्धता की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती?
स्वास्थ्य के लिए ‘स्लो पॉइजन’ बनता जला हुआ तेल
खाद्य विशेषज्ञों के अनुसार बार-बार इस्तेमाल किया गया जला हुआ तेल शरीर के लिए धीमे ज़हर की तरह काम करता है। इससे फूड प्वाइजनिंग, पेट दर्द, उल्टी-दस्त, एसिडिटी और लीवर से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। लंबे समय तक ऐसे तेल का सेवन कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों की आशंका भी पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चे, बुजुर्ग और रोज़ बाहर खाने वाले लोग सबसे अधिक खतरे में हैं।
खाद्य सुरक्षा विभाग की चुप्पी क्यों?
सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह है कि खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग आखिर क्या कर रहा है? क्या विभागीय अधिकारी कभी इन दुकानों की जांच करने पहुंचे? क्या तेल की गुणवत्ता, लाइसेंस और स्वच्छता मानकों की नियमित जांच होती है, या फिर सब कुछ कागज़ों में ही सिमट कर रह गया है?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि समय-समय पर सख्त जांच और कार्रवाई होती, तो ऐसी स्थिति पैदा ही नहीं होती। विभाग की चुप्पी न सिर्फ उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह संदेह भी पैदा करती है कि कहीं मिलीभगत के चलते तो जनता की सेहत को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा?
जनता की मांग—तुरंत जांच और सख्त कार्रवाई
अब आम जनता और जागरूक नागरिकों की मांग है कि संबंधित समोसा दुकानों पर तत्काल छापेमारी, तेल के सैंपल की लैब जांच, और दोषी पाए जाने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही खाद्य सुरक्षा विभाग को यह भी स्पष्ट करना होगा कि अब तक इस मामले में उसने क्या कदम उठाए और भविष्य में ऐसी लापरवाही रोकने के लिए क्या ठोस योजना है।
यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला केवल समोसे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे जिले की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल बनकर खड़ा होगा।

