अम्बेडकरनगर। विश्व प्रसिद्ध सूफी संत सैयद मखदूम अशरफ की दरगाह किछौछा में मोहर्रम के दौरान दूर-दराज से आने वाले हजारों जायरीनों की आस्था पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। दरगाह इंतजामिया कमेटी की लापरवाही के चलते पवित्र नीर शरीफ की पोखरी में घास उग आई है और जल प्रवाह अवरुद्ध हो गया है, जिससे पानी के दूषित होने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
सरकार भले ही संचारी रोगों की रोकथाम के लिए चूना छिड़काव और जलस्रोतों की सफाई का दावा कर रही हो, लेकिन हकीकत दरगाह परिसर में अलग ही तस्वीर पेश कर रही है। नीर शरीफ के जल को आस्था से पीने वाले जायरीन गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
क्षय रोगियों की संख्या में इजाफा
सरकारी अस्पतालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो दरगाह क्षेत्र में क्षय (टीबी) रोगियों की संख्या में खतरनाक इजाफा दर्ज किया गया है। चिकित्सकों द्वारा मरीजों की मेडिकल हिस्ट्री खंगालने पर यह सामने आया कि अधिकांश लोग लंबे समय से नीर शरीफ का जल पीते आ रहे हैं, जिससे वे संक्रमण का शिकार हो रहे हैं। वहीं वर्तमान इंतजामिया कमेटी के जिम्मेदार सैयद फैजान अशरफ चांद मियां ने बताया कि पुरानी कमेटी के जिम्मेदार लोगों की नासमझी का नतीजा है कि नीर शरीफ की यह स्थिति हुई है। जिसे जल्द ही दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बसखारी की टीम ने बढ़ती बीमारी को देखते हुए किछौछा दरगाह और भिदूण समेत आसपास के क्षेत्रों में निशुल्क मेडिकल कैंप लगाया। डॉक्टर भास्कर ने जानकारी दी कि हाल ही में आयोजित शिविर में कुल 442 लोगों की बलगम जांच कराई गई, जिनमें से 30 लोग टीबी के मरीज चिन्हित हुए। मरीजों को फौरन निशुल्क टीबी किट उपलब्ध कराई जा रही है और उनका उपचार जारी है।
प्रशासन पर उठ रहे सवाल
लापरवाही और अव्यवस्थाओं के चलते जायरीनों की आस्था के केंद्र नीर शरीफ का जल अब बीमारियों का कारण बनता जा रहा है। वहीं, स्थानीय लोगों और जायरीनों ने प्रशासन और दरगाह कमेटी से मांग की है कि जल्द से जल्द पोखरी की सफाई कराई जाए और जल को स्वच्छ रखने की मुकम्मल व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि आस्था के नाम पर लोग अपनी सेहत दांव पर न लगाएं।