अम्बेडकरनगर। कड़ाके की ठंड से आम जनजीवन बेहाल है, लेकिन अम्बेडकरनगर जनपद के विकास खंड जहांगीरगंज अंतर्गत पाठकपुर गांव में रहने वाला एक दिव्यांग व्यक्ति ऐसा भी है, जो न सिर्फ मौसम की मार झेल रहा है, बल्कि सरकारी योजनाओं और सामाजिक संवेदनाओं से भी कोसों दूर है।
सरकार गरीबों को प्रधानमंत्री आवास, किसानों को कृषि योजनाओं और जरूरतमंदों को सामाजिक सुरक्षा लाभ देने का दावा करती है, लेकिन पाठकपुर निवासी कपिल देव इन तमाम योजनाओं से आज भी वंचित हैं। हैरानी की बात यह है कि वह दोनों आंखों से पूरी तरह दृष्टिहीन हैं, इसके बावजूद उन्हें न आवास मिला, और न ही ठंड से बचाव का कोई साधन।
भाई ने निकाला घर से, पुलिस बनी सहारा
पीड़ित कपिल देव का दर्द यहीं खत्म नहीं होता। आरोप है कि उनके ही बड़े भाई ने मारपीट कर उन्हें घर से बाहर निकाल दिया और मकान में ताला जड़ दिया। बेघर होकर दर-दर भटकने को मजबूर कपिल देव ने आखिरकार स्थानीय पुलिस प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई। पुलिस की पहल से उन्हें रहने के लिए एक अस्थायी आशियाना तो मिला, लेकिन खाने-पीने और ठंड से बचाव की कोई व्यवस्था नहीं हो सकी।मजार पर जाकर जीने की मजबूरी
मजबूरी की हद तब सामने आती है जब यह दृष्टिहीन व्यक्ति आजमगढ़ के पौहारी बाबा की सरैया स्थित मजार पर हर सोमवार और बृहस्पतिवार को जाकर पूजा-पाठ करते है और वहीं से किसी तरह जीवनयापन करते है। इस भीषण ठंड में उनके पास गर्म कपड़े तक नहीं हैं, जो इंसानियत पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
समाजसेवियों और सिस्टम से सवाल
एक ओर जहां समाजसेवी गरीबों और असहायों की मदद के दावे करते हैं, वहीं दूसरी ओर यह दिव्यांग व्यक्ति उनकी नजरों से भी ओझल बना हुआ है। सवाल यह उठता है कि
- क्या सरकारी योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित हैं?
- क्या समाजसेवा चुनिंदा चेहरों तक ही सिमट कर रह गई है?
कपिल देव की यह कहानी न सिर्फ प्रशासन और समाजसेवियों के लिए आईना है, बल्कि सरकार के दिव्यांग कल्याण और सामाजिक सुरक्षा दावों पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है।
अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी, जनप्रतिनिधि और समाजसेवी इस पीड़ा को कब तक अनदेखा करते हैं, या फिर किसी को सच में इस दिव्यांग के जीवन में रोशनी लाने की फिक्र होगी।

