- वेनकाब हो वे चेहरे जो बेमौत मरे गोवंशों के दोषी हैं।
- गलन भरी ठंड में गोवंशों के लिए काऊ कोट नहीं है व्यवस्था।
गोविंद वार्ता/अंबेडकरनगर। उत्तर प्रदेश योगी सरकार के महत्वाकांक्षी योजनाओं में अहम स्थान रखने वाला गौशाला योजना अम्बेडकर नगर में दम तोड़ता हुआ नजर आ रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार गोवंश संरक्षण के लिए तमाम योजनाएं चल रही हैं। फिर भी सड़कों पर घूम रहे आवारा गोवंश ठंड कोहरे और सर्द हवाओं के शिकार होते नजर आ रहे ऐसे में अस्थाई रूप से गौशालाओं का व्यवस्था जनपद में कराई गई है लेकिन गौशाला में न तो जानवरों के लिए काऊ कोर्ट की व्यवस्था है न ही अलाव और न ही समुचित चारा और चिकित्सीय उपचार की व्यवस्था है सब कुछ बदहाल नजर आ रहा है जिसके कारण गोवंश बीमारियों की जद में तेजी आते जा रहे हैं। आखिर क्यों गोवंशों के लिए चलाई जा रही योजनाओं में धरातल पर कोई भी काम नहीं दिखाई दे रहा।
मुख्यमंत्री के आदेशों का जिलाधिकारी निकल रहे पलीता। आवारा पशुओं से किसानों की फसल बचाने व सड़कों पर आवारा घूमन वाले गोवंशों के लिए की गई पहल और इन गोवंशों के रखरखाव भोजन पानी की व्यवस्था के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने भारी भरकम बजट खर्च कर अस्थाई गौशालाओं की स्थापना की है। जहां पर आवारा पशुओं की देख-देख रखरखाव और जीवन सुरक्षित हो,जिसके भूसा चारा के अलावा मौसम के अनुसार मिलने वाली सुविधाएं गौशाला तक पहुंचाने के लिए भारी भरकम बजट पेश कर सरकार अपने कर्तव्यों का निर्वाह कर रही है और सभी जिलों के जिलाधिकारी को दिशा निर्देश भी जारी करते हुए शक्त हिदायत दिया है।अपने सरकारी मशीनरी से इस महत्वाकांक्षी कार्य को अंजाम दे रही है।
वहीं जनपद के विकासखंड क्षेत्र कटेहरी अंतर्गत ग्राम सभा टिकंपरा में गौशाला की हकीकत और वाकया को देखकर आपकी रूह भी कांप जाएगी किस तरीके से गोवंशों की मौतें हो रही हैं। सोशल मीडिया से लेकर अखबारों में मामला तेजी से वायरल हो रहा है फिर भी जिम्मेदारान पूरी तरह से मौन व्रत धारण कर बैठे हुए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना को चारों खोने चित करने में जिम्मेदारान पूरी शिद्दत से लगे हुए हैं। जिम्मेदार अफसरों से लेकर वीडियो ,सेक्रेटरी एवं प्रधान तक गोवंशों के हत्यारे बन बैठे हैं। “देखिए मुख्यमंत्री जी! आज आपका भी कलेजा दहल जाएगा” जिसे हम लोग गौ माता कहते और पूजते हैं आज उनकी दुर्दशा देखकर आपके पैरों तले जमीन खिसक जाएगी।
मौत के आगोश में एक नहीं दो नहीं तीन नहीं कई गोवंश सोए हुए नजर आएंगे और यह गोवंश कब दुनिया को अलविदा कह गए यह मीडिया से छुपाया जा रहा है। इतना ही नहीं इसी गौशाला के परिसर में गोवंशों के कंकाल भी आसानी से देखने को मिल जाएंगे जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कितने मानवताहीन, संवेदनहीन और गैर जिम्मेदारान तरीके से गोवंशों के साथ यह जघन्य अपराध किया जा रहा है। जिसका जीता जागता सबूत विकासखंड कटेहरी क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम सभा टिकंपरा में मिल जाएगा। गांव के ही कुछ लोगों की सूचना पर जब टिकंपारा गौशाला का नजारा देखकर पैरों तले जमीन खिसक जाएगी। ग्राम वासियों में घटना को लेकर काफी आक्रोश व्याप्त है और जुबान से बद्दुआएं निकल रही थी कि बेजुबानों की हत्या करने वालों तुम्हें इस पाप का अंजाम तो भुगतना ही होगा।
वायरल हो रही घटना में आसानी से देखा जा सकता है कि मौत की नींद सोए गोवंशों और विषम परिस्थितियों में जीवन जी रहे गोवंशों के दर्द को बयां कर रही है। जब इस संदर्भ में कटेरी विकासखंड अधिकारी (वीडियो) से बात करने का प्रयास किया गया तो संपर्क ही नहीं हो सका, सेक्रेटरी तो जान छुड़ाकर इधर-उधर भगता फिर रहा है जुगाड़ लगा रहा है किसी तरीके से मामला रफा-दफा हो जाए। बताते चले की इन गोवंशों के लिए कोई भी चिकित्सी सुविधा भी उपलब्ध नहीं हो रहा है जबकि कई गोवंशों की हालत अभी भी बहुत खराब है।
वहीं ग्राम प्रधान कुछ भी कहने से कतरा रहा है अब सवाल बहुत बड़ा है कि इस पूरे घटनाक्रम का जिम्मेदार कौन है वह कौन लोग हैं जो इन गोवंशों के हत्यारे हैं जिनके मानवहीनता और संवेदनहीनता के कारण गोवंशों कि यह दुर्दांत दशा हो गई। मुख्यमंत्री जी! अगर अब नहीं तो फिर कभी नहीं। यही हाल अंबेडकर नगर के लगभग गौशालाओं की है जिसकी रियलिटी देखकर सुनकर आप अपना माथा पकड़ लेंगे।
फिलहाल अभी तक मामले में किसी भी प्रकार की कोई कार्रवाई होती नजर नहीं आ रही।
मुख्यमंत्री के आदेश और निर्देश के बावजूद नहीं हो रहा कार्य।
मुख्यमंत्री द्वारा निर्देश दिए गये हैं कि कड़ाके की सर्द भरी गलन में गोशालाओं में विशेष प्रबंध किये जाएं। किसी भी गोवंश की भूख और ठंड के चलते मौत न हो। उन्होंने इससे पहले भी सभी जिलों के डीएम को वर्चुअल माध्यम से इसको लेकर रणनीति बनाने के निर्देश दिए थे। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री ने कहा कि जिलों में पशु आश्रय स्थलों की देखरेख के लिए सामाजिक संस्थाओं की मदद भी ली जा सकती है। कहां है कि गोवंशों के संरक्षण और गौशालाओं के सफल संचालन के लिए एमओयू किए जाएं और इसके जरिए सहभागिता से जुड़े सेल्फ सस्टेनेबल मॉडल को पूरे देश में लागू करने के निर्देश दिए जा चुके हैं।
ग्राम वासियों की मांग
इस घटना से छुब्द हुए ग्राम वासियों में काफी आक्रोश व्याप्त है मांग किया है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और बेमौत मरे गोवंशों का पोस्टमार्टम कर सच्चाई को सामने लाया जाए ताकि भविष्य में फिर ऐसी घटना को दोहराया न जाए।